उदास रहने वाले खरगोश की कहानी
उदास रहने वाले खरगोश की कहानी:
एक बार एक खरगोश अपने घर में आराम से रहता था लेकिन उसे खेलने के लिए दोस्त की आवश्यकता थी वह बहूत प्रयास करता पर कोई उसका दोस्त नहीं बनता।
क्योंकि उदासी से भरा चेहरा किसी को पसंद नही था।उसे आपने आप में हमेशा अकेलापन महसूस होता था वह भगवान से प्रार्थना करता कि कोई दोस्त तो उसे मिल जाता पर कोई दोस्त नहीं मिलता एक दिन ऐसे ही वह जंगल मे टहल रहा था कि एक हिरण ने उसे उदास देखा और उसकी उदासी का कारण खरगोश ने बताया कि उसका कोई दोस्त नहीं बन रहा है क्योंकि मैं बहुत उदास रहता हूं कभी मिलने उसे उसकी उदासी का कारण पूछा ,
खरगोश ने कहा मैं और मेरे माता-पिता एक साथ अपने घर में रहते थे लेकिन एक दिन एक शेर आया और मेरे माता-पिता को खो गया तब से मैं अकेला हो गया और मुझे हमेशा उनकी याद आती है इसलिए मुझे अकेलापन महसूस होता है।
हिरण जो पास के ही स्कूल का शिक्षक था उसने खरगोश के भावनाओं को भांप लिया और वह स्कूल जाकर वहां के अन्य जानवरों से खरगोश से दोस्ती करने के लिए कहा,
हिरण ने स्कूल में पढ़ने वाले सभी पशु पक्षियों से कहा कि मुसीबत और दुख में हमें हमेशा साथ निभाना चाहिए, यही अच्छे बच्चों की निशानी है और समझदारी की बात भी, सभी को मिलजुल कर खरगोश के दुख के घड़ी में उसका साथ देना चाहिए,
हिरण (शिक्षक) के द्वारा यह सुनते ही सभी अब खरगोश से दोस्ती करने चले आते है जिससे खरगोश बहुत खुश होता है और अच्छे से पढ़ाई करने लगता है।
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